जगदलपुर । विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर बस्तर जिला प्रशासन ने यूनिसेफ़ के सहयोग से संचालित ‘प्रोजेक्ट मंथन’ के तहत विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों और आदिवासी छात्रावासों में मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित संवेदनशीलता कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में आत्म-अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना और संस्थानों के स्टाफ के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना रहा।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित बाल देखभाल संस्थानों, आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों, बाल संप्रेक्षण गृह और ओपन शेल्टर होम (बालक) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया। इन सत्रों में न केवल बच्चों ने बल्कि काउंसलर और सुपरिंटेंडेंट्स जैसे स्टाफ ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया, जो मानसिक स्वास्थ्य को संस्थागत स्तर पर प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर वीडियो स्क्रीनिंग, मनो-सामाजिक समूह गतिविधियाँ और विस्तृत संवाद सत्र आयोजित किए गए। इन गतिविधियों का मुख्य फोकस एक ऐसा सहायक वातावरण बनाना था जहाँ बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त कर सकें। स्टाफ संवेदनशीलता सत्रों का विशेष आयोजन बाल संप्रेक्षण गृह और ओपन शेल्टर होम में किया गया, जिसका लक्ष्य इन महत्वपूर्ण संस्थानों के कर्मियों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकताओं को समझने और उचित समर्थन प्रदान करने के लिए सशक्त बनाना था।
बाल देखभाल संस्थानों में कार्यरत कर्मियों और बच्चों से जुड़े हितधारकों की क्षमता वृद्धि करने तथा मानसिक स्वास्थ्य को संस्थागत स्तर पर प्राथमिकता देने की एक अनूठी पहल प्रोजेक्ट मंथन है, जो जिला प्रशासन के सहयोग से यूनिसेफ़ द्वारा संचालित है।
कार्यक्रमों को बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों का महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ। इन सभी कार्यक्रमों का सफल संचालन प्रोजेक्ट मंथन की जिला सलाहकार (मानसिक स्वास्थ्य एवं बाल संरक्षण), सुश्री श्रीया वैद्य द्वारा किया गया।





